Pollution consents (प्रदूषण स्वीकृति) ऐसे कानूनी दस्तावेज होते हैं जो औद्योगिक इकाइयों या अन्य संस्थाओं को प्रदूषणकारी गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति देते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन किया जाए और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके।
प्रदूषण स्वीकृतियों के मुख्य पहलू:
1. **अनुमति की आवश्यकता**: किसी भी उद्योग या संस्था को अपनी गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के लिए सरकार या संबंधित प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त करनी होती है।
2. **मानकों का पालन**: प्रदूषण की अनुमति प्राप्त करने के लिए संबंधित उद्योग या संस्था को पर्यावरणीय मानकों और नियमों का पालन करना होता है।
3. **निगरानी और निरीक्षण**: स्वीकृति प्राप्त करने के बाद, संबंधित प्राधिकरण नियमित रूप से उद्योगों की निगरानी और निरीक्षण करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं।
4. **प्रदूषण की रोकथाम**: प्रदूषण स्वीकृतियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि उद्योग अपनी गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर रखें और उचित तकनीकों का उपयोग करके प्रदूषण को नियंत्रित करें।
5. **नवीनीकरण**: इन स्वीकृतियों की एक निश्चित समयावधि होती है और इन्हें नियमित अंतराल पर नवीनीकृत करना पड़ता है।
प्रदूषण स्वीकृतियों (Pollution Consents) को बनाना और जारी करना सरकार और संबंधित नियामक प्राधिकरणों की जिम्मेदारी होती है। भारत में, प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित स्वीकृतियों को जारी करने का कार्य मुख्यतः राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा किया जाता है। ये प्राधिकरण भारत के पर्यावरण कानूनों के तहत कार्य करते हैं।
प्रमुख प्राधिकरण और कानून:
1. **केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)**:
- **स्थापना**: CPCB की स्थापना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत की गई है।
- **भूमिका**: CPCB देशभर में प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित नीतियों का निर्माण और कार्यान्वयन करता है। यह राज्य बोर्डों को दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है।
2. **राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs)**:
- **स्थापना**: प्रत्येक राज्य में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की जाती है।
- **भूमिका**: SPCBs अपने-अपने राज्यों में प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित स्वीकृतियों का जारी करना और निगरानी करना सुनिश्चित करते हैं।
प्रमुख कानून:
1. **पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986**:
- यह एक व्यापक अधिनियम है जो पर्यावरण के संरक्षण और सुधार से संबंधित है। इसके तहत CPCB और SPCBs का गठन किया गया है।
2. **जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974**:
- इस अधिनियम का उद्देश्य जल प्रदूषण को रोकना और नियंत्रित करना है। इसके तहत जल प्रदूषण की स्वीकृतियों का प्रावधान है।
3. **वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981**:
- यह अधिनियम वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए है। इसके तहत वायु प्रदूषण की स्वीकृतियों का प्रावधान है।
प्रक्रिया:
1. **आवेदन**: उद्योग या संस्था को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास आवेदन करना होता है।
2. **जांच और निरीक्षण**: बोर्ड के अधिकारी आवेदन की जांच करते हैं और आवश्यक निरीक्षण करते हैं।
3. **स्वीकृति**: यदि उद्योग निर्धारित मानकों का पालन करता है, तो स्वीकृति जारी की जाती है।
इस प्रकार, प्रदूषण स्वीकृतियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि औद्योगिक गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और प्रदूषण नियंत्रित हो सके।
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