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Monday, July 1, 2024

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 l Payment of Gratuity Act, 1972

 ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 




लागू होने का कारण:

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 को कर्मचारियों को उनकी लंबी सेवा के लिए पुरस्कृत करने और सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए लागू किया गया था।

इस अधिनियम से पहले, कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान नियोक्ता के विवेकाधीन था। इसका मतलब था कि कई कर्मचारियों को, खासकर अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले, ग्रेच्युटी नहीं मिल पाती थी।

यह अधिनियम यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था कि सभी पात्र कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर उचित ग्रेच्युटी मिले।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • यह अधिनियम उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिनमें कम से कम 10 कर्मचारी कार्यरत हैं।
  • पात्र कर्मचारी को प्रत्येक पूर्ण किए गए वर्ष की सेवा के लिए 15 दिनों का वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता सहित) ग्रेच्युटी के रूप में मिलता है।
  • सेवानिवृत्ति, मृत्यु, विकलांगता, त्यागपत्र या छंटनी सहित विभिन्न परिस्थितियों में ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है।
  • 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी कर-मुक्त है।
  • नियोक्ता को ग्रेच्युटी का भुगतान कर्मचारी के सेवा अवधि के समाप्त होने के 60 दिनों के भीतर करना होता है।
  • अधिनियम के तहत विवादों को श्रम न्यायालयों द्वारा निपटाया जाता है।

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 भारत में कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है। इसने लाखों कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है और उन्हें उनकी लंबी सेवा के लिए उचित सम्मान मिलने में मदद की है।

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के मुख्य उपदेश:

पात्रता:

  • यह अधिनियम उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिनमें कम से कम 10 कर्मचारी कार्यरत हैं।
  • निरंतर 5 वर्षों की सेवा पूरी करने वाले सभी कर्मचारी ग्रेच्युटी के पात्र होते हैं।
  • कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे कि मृत्यु, विकलांगता, या छंटनी, कम सेवा अवधि वाले कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार हो सकते हैं।

ग्रेच्युटी की गणना:

  • ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी के अंतिम आहरित वेतन (मूल वेतन + महंगाई भत्ता) के आधार पर की जाती है।
  • प्रत्येक पूर्ण किए गए वर्ष की सेवा के लिए 15 दिनों का वेतन ग्रेच्युटी के रूप में दिया जाता है।
  • सूत्र: ग्रेच्युटी = अंतिम आहरित वेतन (दिनों में) x 15/365 x सेवा अवधि (वर्षों में)

उदाहरण:

मान लीजिए कि एक कर्मचारी का अंतिम आहरित वेतन ₹50,000 प्रति माह है और उसने 10 वर्षों तक सेवा की है।

इसकी ग्रेच्युटी होगी:

₹50,000 x 30 x 15 / 365 x 10 = ₹2,50,000

भुगतान:

  • नियोक्ता को कर्मचारी के सेवा अवधि के समाप्त होने के 60 दिनों के भीतर ग्रेच्युटी का भुगतान करना होता है।
  • भुगतान चेक, डीडी या इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जा सकता है।

कर:

  • Gratuity पर टैक्स लगता है, लेकिन यह राशि पर निर्भर करता है। यहां ग्रेच्युटी पर कर लगाने का तरीका है:

    कर छूट की सीमा:

    • भारत सरकार ने हाल ही में ग्रेच्युटी की कर छूट की सीमा को बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया है। इसका मतलब है कि यदि आपकी ग्रेच्युटी राशि ₹20 लाख से कम या बराबर है, तो आपको उस पर कोई कर नहीं देना होगा।

    कर योग्य राशि पर कर:

    • यदि आपकी ग्रेच्युटी राशि ₹20 लाख से अधिक है, तो केवल अतिरिक्त राशि पर ही कर लगेगा। उदाहरण के लिए, यदि आपको ₹25 लाख की ग्रेच्युटी मिलती है, तो केवल ₹5 लाख (₹25 लाख - ₹20 लाख) पर कर लगेगा।

    कर की गणना कैसे करें:

    उदाहरण:

    मान लीजिए आपकी कर योग्य आय ₹5 लाख है और आपको ₹30 लाख की ग्रेच्युटी मिलती है। इस स्थिति में:

    • कर छूट की राशि = ₹20 लाख
    • कर योग्य राशि = ₹30 लाख - ₹20 लाख = ₹10 लाख

    अब, आपकी कर योग्य आय में ₹10 लाख की ग्रेच्युटी राशि जुड़ जाएगी। तो, कुल कर योग्य आय हो जाएगी ₹15 लाख।

    आपको अपनी कर स्लैब के अनुसार इस राशि पर कर का भुगतान करना होगा।

    ध्यान दें: यह सिर्फ एक उदाहरण है। वास्तविक कर देयता आपकी आयकर स्लैब और अन्य आय स्रोतों के आधार पर भिन्न हो सकती है।

    कर भुगतान प्रक्रिया:

    • यदि आपकी ग्रेच्युटी राशि ₹10 लाख से अधिक है, तो आपका नियोक्ता उस पर स्रोत पर कर कटौती (TDS) करेगा।
    • आपको अपना आयकर रिटर्न दाखिल करते समय शेष कर का भुगतान करना पड़ सकता है।
  • ग्रेच्युटी किन-किन कर्मचारियों को दी जा सकती है और कितनी सैलरी पर दी जाती है?

    ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत, निम्नलिखित कर्मचारी ग्रेच्युटी के पात्र हैं:

    • वे सभी कर्मचारी जिन्होंने किसी भी प्रतिष्ठान में लगातार 5 वर्षों तक सेवा पूरी की है।
    • वे कर्मचारी जो 5 वर्ष से कम की सेवा अवधि के बाद मृत्यु, विकलांगता या छंटनी के कारण सेवा से हट जाते हैं।
    • अन्य विशेष परिस्थितियों में, जैसे कि स्थायी विकलांगता या कंपनी द्वारा बंद किए जाने पर, कम सेवा अवधि वाले कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार हो सकते हैं।

ग्रेच्युटी की सीमा और अपवाद

सीमाएँ (Limits):

  • कर छूट की सीमा: भारत सरकार ने हाल ही में ग्रेच्युटी पर कर छूट की सीमा को बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया है। इसका मतलब है कि यदि आपकी ग्रेच्युटी राशि ₹20 लाख से कम या बराबर है, तो आपको उस पर कोई कर नहीं देना होगा।
  • कर्मचारियों की संख्या: ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम केवल उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जिनमें कम से कम 10 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसका मतलब है कि 10 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियां अधिनियम के तहत ग्रेच्युटी का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं हैं, हालांकि वे ऐसा करने का विकल्प चुन सकती हैं।

अपवाद (Exceptions):

  • अल्प सेवा (Less than 5 years): सामान्य तौर पर, ग्रेच्युटी पाने के लिए कर्मचारी को लगातार 5 वर्ष तक सेवा करनी होती है। हालांकि, कुछ अपवाद हैं:
    • मृत्यु: कर्मचारी की मृत्यु होने पर, उसके आश्रितों को किसी भी सेवा अवधि के बावजूद ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है।
    • विकलांगता: यदि कोई कर्मचारी स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है और काम करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसे सेवा अवधि की परवाह किए बिना ग्रेच्युटी का भुगतान किया जा सकता है।
    • छंटनी: यदि किसी कर्मचारी को कंपनी द्वारा कम किया जाता है (छंटनी), तो वह सेवा अवधि की परवाह किए बिना ग्रेच्युटी का हकदार हो सकता है।
    • नियोक्ता का व्यवसाय बंद होना: अगर कंपनी बंद हो जाती है, तो कर्मचारियों को, भले ही उनकी सेवा अवधि कम हो, ग्रेच्युटी का भुगतान किया जा सकता है।
  • यदि नियोक्ता ग्रेच्युटी नहीं दे रहा है तो क्या करना चाहिए:

    यदि आपका नियोक्ता आपको ग्रेच्युटी देने से इनकार कर रहा है, तो आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:

    1. नियोक्ता से बात करें:

    • सबसे पहले, शांति से और विनम्रता से अपने नियोक्ता से बात करें।
    • उन्हें बताएं कि आप ग्रेच्युटी के हकदार हैं और आप इसे प्राप्त करना चाहते हैं।
    • यदि संभव हो तो, अपने दावे का समर्थन करने के लिए लिखित दस्तावेज दिखाएं, जैसे कि आपका नियुक्ति पत्र, वेतन विवरण, या सेवा अवधि का प्रमाण पत्र।

    2. श्रम विभाग में शिकायत दर्ज करें:

    • यदि आपके नियोक्ता से बात करने से कोई हल नहीं निकलता है, तो आप श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
    • यह राज्य सरकार का एक विभाग है जो कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच विवादों को सुलझाने में मदद करता है।
    • शिकायत दर्ज करने के लिए, आपको आवश्यक दस्तावेजों के साथ श्रम विभाग के कार्यालय जाना होगा।
    • विभाग आपके दावे की जांच करेगा और नियोक्ता को आपके ग्रेच्युटी का भुगतान करने का निर्देश देगा।

    3. कानूनी सलाह लें:

    • यदि श्रम विभाग भी आपके मामले को हल करने में विफल रहता है, तो आप वकील से सलाह ले सकते हैं।
    • वकील आपको आपके कानूनी विकल्पों को समझने और उचित कानूनी कार्रवाई करने में मदद कर सकता है।

    यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं:

    • ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 भारत में ग्रेच्युटी के भुगतान को नियंत्रित करता है।
    • यदि आप इस अधिनियम के तहत ग्रेच्युटी के पात्र हैं और आपका नियोक्ता आपको भुगतान नहीं कर रहा है, तो आपके पास कानूनी अधिकार हैं।
    • आपको डरना या हतोत्साहित नहीं होना चाहिए।
    • अपने हक के लिए खड़े हों और उचित कदम उठाएं।

    • ग्रेच्युटी कब नहीं दी जाती है और इसमें एंप्लॉयर और एंप्लॉयी को क्या ध्यान रखना चाहिए

      ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के अनुसार, निम्नलिखित परिस्थितियों में ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाता है:

      1. अपर्याप्त सेवा:

      • यदि कोई कर्मचारी निरंतर 5 वर्ष की सेवा पूरी किए बिना स्वेच्छा से नौकरी छोड़ देता है, तो उसे ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाता है।
      • कुछ अपवाद हैं, जैसे कि मृत्यु, विकलांगता, या छंटनी।

      2. दुर्व्यवहार:

      • यदि किसी कर्मचारी को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत बर्खास्त कर दिया जाता है, तो उसे ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जा सकता है।
      • हालांकि, यह साबित करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि बर्खास्तगी का कारण उचित था।

      3. लघु अवधि का कार्य:

      • यदि कोई कर्मचारी अनुबंध या अस्थायी आधार पर काम करता है, और उसकी सेवा अवधि 5 वर्ष से कम है, तो उसे आमतौर पर ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जाता है।
      • कुछ अपवाद हो सकते हैं, इसलिए यह जानने के लिए कि क्या आप पात्र हैं, अपने नियोक्ता से जांच करना सबसे अच्छा है।

      4. वेतन में कटौती:

      • यदि किसी कर्मचारी के वेतन में अनुशासनात्मक कारणों से या खराब प्रदर्शन के कारण कटौती की जाती है, तो उस कटौती की गई राशि पर ग्रेच्युटी की गणना नहीं की जाएगी।

      एम्प्लॉयर के लिए ध्यान रखने योग्य बातें:

      • यह सुनिश्चित करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि वे पात्र कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान करें।
      • ग्रेच्युटी का भुगतान कर्मचारी के सेवा अवधि के समाप्त होने के 60 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए।
      • यदि नियोक्ता ग्रेच्युटी का भुगतान करने में विफल रहता है, तो कर्मचारी कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
      • नियोक्ता को ग्रेच्युटी से संबंधित सभी रिकॉर्ड रखना चाहिए, जिसमें कर्मचारी का नाम, सेवा अवधि, वेतन विवरण और भुगतान की तारीख शामिल है।

      एम्प्लॉयी के लिए ध्यान रखने योग्य बातें:

      • यदि आप ग्रेच्युटी के हकदार हैं, तो अपने नियोक्ता से इसकी मांग करने में संकोच न करें।
      • यदि आपको लगता है कि आपको ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया जा रहा है, तो आप श्रम विभाग या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकते हैं।
      • ग्रेच्युटी से संबंधित सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखें, जैसे कि आपका नियुक्ति पत्र, वेतन विवरण, और सेवा अवधि का प्रमाण पत्र।

      क्या ग्रेच्युटी का पैसा कर्मचारी की वेतन से  काटा जाता है।

      यह एक पूरी तरह से अलग भुगतान होता है जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को उसकी सेवा अवधि के दौरान किए गए योगदान के लिए दिया जाता है।

      ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी के अंतिम आहरित वेतन (मूल वेतन + महंगाई भत्ता) और सेवा अवधि के आधार पर की जाती है।

      यह नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है कि वे पात्र कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान करें, और इसे कर्मचारी के वेतन से काटकर नहीं दिया जाना चाहिए।

      यहां कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं:

      • ग्रेच्युटी एक अतिरिक्त लाभ है, वेतन का हिस्सा नहीं है।
      • यह कर्मचारी के अधिकार का हिस्सा है और इसे नियोक्ता द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए।
      • यदि नियोक्ता ग्रेच्युटी का भुगतान करने में विफल रहता है, तो कर्मचारी कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

      अधिक जानकारी के लिए, आप ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 की एक प्रति देख सकते हैं या श्रम मंत्रालय की वेबसाइट पर जा सकते हैं: https://labour.gov.in/

      यहाँ पर विभिन्न फॉर्म्स की जानकारी दी गई है जो ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के तहत उपयोग में आते हैं:

      1. Form No. A [See sub rule (1) of rules 3]: Notice of Opening

      • कब भरा जाता है: जब कोई नई संस्था (स्थापन) शुरू होती है।
      • उद्देश्य: इस फॉर्म के माध्यम से नियोक्ता नियंत्रक प्राधिकारी को सूचित करता है कि एक नई संस्था चालू हो गई है।

      2. Form No. B [See sub rule (2) of rules 3]: Notice of Change

      • कब भरा जाता है: जब किसी संस्था में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन होता है जैसे कि नाम, पता, प्रबंधन, या स्वामित्व में बदलाव।
      • उद्देश्य: यह फॉर्म नियंत्रक प्राधिकारी को संस्था में हुए परिवर्तनों के बारे में सूचित करता है।

      3. Form No. C [See sub rule (3) of rules 3]: Notice of Closure

      • कब भरा जाता है: जब कोई संस्था बंद हो रही होती है।
      • उद्देश्य: इस फॉर्म के माध्यम से नियोक्ता नियंत्रक प्राधिकारी को सूचित करता है कि संस्था बंद हो रही है और ग्रेच्युटी के लंबित दावों का निपटान किया जाना चाहिए।

      4. Form No. E [See sub rule (2) of rules 5]: Notice of Withdrawal of Notice Excluding Husband from Family

      • कब भरा जाता है: जब कोई कर्मचारी अपने पति को परिवार के नामांकन से बाहर करने के लिए नोटिस वापस लेना चाहता है।
      • उद्देश्य: यह फॉर्म यह सूचित करता है कि पहले जारी किए गए नोटिस को वापस लिया जा रहा है।

      5. Form No. F [See sub rule (1) of rules 6]: Nomination

      • कब भरा जाता है: जब कोई कर्मचारी अपने ग्रेच्युटी के लिए नामांकन करता है।
      • उद्देश्य: इस फॉर्म के माध्यम से कर्मचारी यह तय करता है कि उसकी मृत्यु की स्थिति में ग्रेच्युटी किसे दी जाएगी।

      6. Form No. G [See sub rule (3) of rules 6]: Fresh Nomination

      • कब भरा जाता है: जब कोई कर्मचारी नया नामांकन करना चाहता है या अपने मौजूदा नामांकन को अपडेट करना चाहता है।
      • उद्देश्य: यह फॉर्म कर्मचारी के द्वारा किया गया नया नामांकन दर्शाता है।

      7. Form No. H [See sub rule (4) of rules 6]: Modification of Nomination

      • कब भरा जाता है: जब कर्मचारी अपने पहले से किए गए नामांकन में कोई बदलाव करना चाहता है।
      • उद्देश्य: यह फॉर्म नामांकन में संशोधन की प्रक्रिया को दर्ज करता है।

      8. Form No. I [See sub rule (1) of rules 7]: Application for Gratuity by an Employee

      • कब भरा जाता है: जब कोई कर्मचारी अपनी सेवा समाप्त करने के बाद ग्रेच्युटी का दावा करना चाहता है।
      • उद्देश्य: इस फॉर्म के माध्यम से कर्मचारी ग्रेच्युटी के लिए आवेदन करता है और नियोक्ता को सूचित करता है कि वह सेवा समाप्त कर चुका है और ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाना चाहिए।

      इन फॉर्म्स का सही ढंग से उपयोग और समय पर भरा जाना आवश्यक होता है ताकि ग्रेच्युटी संबंधित प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके।






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